मेरी कविता

जहाँ एहसास शब्द बनते हैं
पतझड़ भी कुछ सिखा जाता है, जो गिरता है, वही निखरता है। हर पत्ता कहानी कहता है, हर अंत एक शुरुआत बनता है। ये मौसम नहीं, ज़िंदगी का सच है — जो ठहर जाए, वही कविता बनता है।